नीमच। जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम बरुखेड़ा हल्के से जमीन से जुड़ा धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 100 साल पुराने खातेदार के नाम दर्ज तालाब से जुड़ी जमीन पर फर्जी वारिस खड़े कर उसे बेच दिया गया। मामला सर्वे नंबर 936 और 938 से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां ग्रामीणों के विरोध के बाद फिलहाल तालाब में मिट्टी भरने और कब्जे की तैयारी पर रोक लग गई है।

ग्रामीणों के अनुसार उक्त जमीन लंबे समय से काशीराम भील के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। बताया जा रहा है कि काशीराम भील का करीब 25 वर्ष पूर्व निधन हो चुका था और उनके कोई प्रत्यक्ष या वैध वारिस मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद वर्ष 2024 में अचानक छह लोगों को वारिस बताकर नाम दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का दावा है कि इन्हीं कथित फर्जी वारिसों के माध्यम से जमीन का सौदा देवीलाल नामक व्यक्ति के नाम कर दिया गया। आरोप है कि जमीन हस्तांतरण के कुछ ही महीनों के भीतर लगभग 13 आरी भूमि अन्य लोगों को भी बेच दी गई। इसके बाद जमीन को समतल करने, तालाब क्षेत्र में मिट्टी डालने और खंभे गाड़कर कब्जे की तैयारी शुरू कर दी गई।






