नशे पर वार का दावा, लेकिन कार्रवाई पर पर्दा? विंग के 62 किलो डोडाचूरा केस में उठे सवाल, लंबे समय बाद प्रेस नोट जारी, फिर भी कहानी आधी अधूरी? नशे से दूरी हैं जरूरी 2.0 की आड़ में प्रेस नोट की औपचारिकता पूरी?

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नीमच। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के बीच नारकोटिक्स विंग नीमच की कार्यशैली को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। 28 जुलाई 2026 को 62 किलो से अधिक डोडाचूरा के साथ तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में 29 जुलाई को प्रेस नोट तो जारी कर दिया गया, लेकिन कार्रवाई से जुड़े कई अहम पहलुओं को सार्वजनिक नहीं किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अभियान वास्तव में जनजागृति और पारदर्शिता के लिए है, या फिर सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करने तक सीमित रह गया है?

नारकोटिक्स प्रकोष्ठ नीमच के निरीक्षक तेजेंद्रसिंह सेंगर द्वारा जारी किए प्रेस नोट के अनुसार होटल रजवाड़ी के पास महू-नीमच फोरलेन से बादल उर्फ गुरप्रीत सिंह निवासी पंजाब, राजूसिंह निवासी राजस्थान और सतपाल सिंह निवासी पंजाब को तीन बैगों में भरे 62 किलो से अधिक डोडाचूरा, जिसकी कीमत करीब 9 लाख रुपये बताई गई है, के साथ पकड़ा गया। पूछताछ के आधार पर सत्तू उर्फ सत्यनारायण निवासी हाड़ी पिपलिया को भी धारा 8/29 एनडीपीएस एक्ट में आरोपी बनाया गया।
लेकिन कार्रवाई की घोषणा के साथ ही कई सवाल भी सामने आ गए हैं।

प्रेस नोट जारी, लेकिन आधी अधूरी जानकारी के साथ आरोपियों के फोटो गायब?

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी तो मीडिया को दी गई, लेकिन आरोपियों के फोटो तक जारी नहीं किए गए। और तो और प्रेस नोट में यह भी जानकारी नही दी गई कि तस्कर कौन से वाहन से तस्करी कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अभियान को बड़े स्तर पर चलाने और उपलब्धियों को सामने रखने की बात कही जा रही है, तो कार्रवाई की विजुअल जानकारी सार्वजनिक करने में आखिर क्या आपत्ति थी? 

गुपचुप एनडीपीएस कार्रवाई या पारदर्शिता से दूरी?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लंबे समय से है कि नारकोटिक्स विंग की कई एनडीपीएस कार्रवाइयों की जानकारी सामान्यत सार्वजनिक नहीं की जाती। कार्रवाई होती है, आरोपी पकड़े जाते हैं, लेकिन कई मामलों में न तो विस्तृत प्रेस नोट सामने आता है और न ही मीडिया को समय पर जानकारी मिलती है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि यदि नशे के खिलाफ कार्रवाई इतनी प्रभावी और व्यापक है, तो उसका सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं आता? आखिर कितनी कार्रवाई ऐसी हैं जो गुप्त रखी जाती हैं और जिनकी जानकारी आम जनता तक पहुंचती ही नहीं?

विंग की कार्यप्रणाली के पूर्व में कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें विंग प्रभारी तेजेंद्र सिंह सेंगर को एनडीपीएस कार्रवाइयों में गंभीर आरोप छेलने पड़े। और ट्रांसफर तक हो गया था। 

अभियान चला तो प्रेस नोट जारी कर की गई इतिश्री 

मजेदार बात यह है कि “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान के दौरान इसी कार्रवाई का प्रेस नोट जारी किया गया। इससे सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि क्या अभियान नहीं होता तो इस कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती?

इस मामले को लेकर जब नारकोटिक्स विंग प्रभारी निरीक्षक तेजेंद्र सिंह सेंगर से कार्रवाई को लेकर बाइट लेनी चाही, तो उन्होंने बाइट देने से इंकार कर दिया। इस दौरान अधिकारी ने यह बात भी कही कि “प्रेस नोट जारी कर दिया, मैंने नहीं तो यह भी नहीं करता” इस बात से यह साफ है कि नारकोटिक्स विंग मीडिया को कार्यवाही की जानकारी देने से परहेज़ कर रही हैं? 

अभियान की चमक बनाम जमीनी पारदर्शिता का सवाल

सरकार और पुलिस मुख्यालय नशे के खिलाफ जनजागृति अभियान को बड़े स्तर पर चला रहे हैं। अधिकारियों की ओर से लगातार नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर यदि संबंधित विंग कार्रवाई की जानकारी साझा करने से ही बचती रहे, तो जनता को अभियान की वास्तविक तस्वीर कैसे पता चलेगी? और सबसे अहम—यदि लगातार एनडीपीएस की कार्रवाई हो रही है, तो फिर उनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

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