सैंपल फेल, जुर्माना वसूल, फिर भी गोदाम चालू! पंकज नीरज फर्म पर कार्रवाई के बाद भी सवाल बरकरार, क्या हो तो नहीं रही पुनावृत्ति? 10 सैंपल फैल का मामला न्यायालय में, मंडी प्रशासन ने भी जुर्माना लगाकर की इतिश्री, पारदर्शिता की कमी से उठे सवाल?

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नीमच। कृषि जिंसों की चमक के पीछे अगर प्रतिबंधित सल्फर―हाइड्रा के इस्तेमाल के आरोप हों, प्रयोगशाला जांच में 11 में से 10 सैंपल फैल हो जाने की जानकारी सामने आए और कार्रवाई के कुछ दिनों बाद गोदाम फिर चालू हो जाए, तो सवाल सिर्फ जुर्माने का नहीं, बल्कि निगरानी और जवाबदेही का भी है। दरअसल नीमच के बघाना क्षेत्र के अरनिया कुमार स्थित पंकज कुमार नीरज कुमार फर्म के गोदाम पर करीब पांच महीने पहले जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गोदाम सील किया था। मेथी, धनिया और अजवाइन जैसी कृषि जिंसों को चमकदार बनाने के लिए सल्फर―हाइड्रा कलर सहित रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के आरोपों के बीच सैंपल लिए गए थे। गोदाम में बड़ी मात्रा में अखाद्य सामग्री मिली थी, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित थी।

जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग ने गोदाम से 11 नमूने जांच के लिए भेजे, जिनमें 10 सैंपल जांच में फैल हुए हैं। इसके बाद संबंधित फर्म पर एक लाख रुपये का जुर्माना खाद्य सुरक्षा विभाग ने लगाया था, जबकि मंडी प्रशासन ने भी 1.87 लाख रुपये का आर्थिक दंड वसूल किया। लेकिन जांच में फैल हुआ आंकड़ा अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है? बावजूद गोदाम दोबारा चालू हो गया। अब सवाल यह है कि जब जांच में इतने बड़े पैमाने पर नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, तो आगे ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

बता दे कि मिलावट माफिया पंकज नीरज अपने गोदाम पर सल्फर, हाइड्रा जैसे अखाद्य सामग्री का उपयोग कर भट्टियां लगाई गई थी, और कृषि जिंसों को चमकदार बनाया जा रहा था, जिसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हुआ है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी के अनुसार, पंकज नीरज फर्म पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद गोदाम दोबारा चालू हो गया। अब सवाल यह है कि कार्रवाई के बाद विभाग ने आगे क्या निगरानी की? पहले जिन गतिविधियों को लेकर कार्रवाई हुई थी, उनकी पुनरावृत्ति तो नहीं हो रही है? महज जुर्माना लगा देना और उसके बाद निगरानी की स्थिति स्पष्ट नहीं होना, कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

मंडी प्रशासन ने भी लगाया था 1.87 लाख का जुर्माना, व्यापारिक लाइसेंस पर क्या हुआ?

मामले में कृषि उपज मंडी प्रशासन की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। मिली जानकारी के अनुसार, मंडी सचिव उमेश बसेड़िया ने पंकज कुमार नीरज कुमार फर्म पर 1 लाख 87 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। लेकिन सवाल यह है कि क्या जुर्माना लगाने के बाद फर्म के मंडी लाइसेंस की समीक्षा की गई? क्या लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण जैसे विकल्पों पर विचार हुआ?

गोदाम सील था, तो स्टॉक का क्या हुआ?

इस पूरे मामले में गोदाम की सीलिंग के बाद वहां रखे कृषि जिंसों के स्टॉक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या गोदाम में मौजूद सभी कृषि जिंसों का रिकॉर्ड तैयार किया गया था? क्या संदिग्ध उपज की जप्ती की गई? और क्या स्टॉक के निपटारे या उपयोग को लेकर कोई आदेश जारी हुआ?

खाद्य सुरक्षा विभाग का जवाब—मामला न्यायालय में विचाराधीन

खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजू सोलंकी के अनुसार, करीब पांच महीने पहले हुई कार्रवाई में नमूने अमानक पाए जाने से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय से निराकरण होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। कृषि जिंसों की जब्ती के संबंध में भी न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस पर न्यायालय के आदेश के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के इस पक्ष से स्पष्ट है कि मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में न्यायालय के निर्णय और विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

सैंपल फेल होने के बाद एफआईआर क्यों नहीं?

मामले में एक बड़ा सवाल एफआईआर को लेकर भी है। जब प्रयोगशाला जांच में 11 में से 10 नमूने अमानक पाए जाने की जानकारी सामने आई, तो अब तक आपराधिक कार्रवाई की स्थिति क्या है? खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया संबंधित निर्देशों के अधीन है।

बड़ा सवाल- कार्रवाई का असर कितना?

पंकज नीरज फर्म के मामले में दो विभागों की कार्रवाई, आर्थिक दंड, अमानक नमूनों की रिपोर्ट और न्यायालय में लंबित प्रक्रिया—ये सभी पहलू जवाबदेही की मांग करते हैं। सवाल किसी को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि कृषि जिंसों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और मानव स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़ बन्द हो।

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