साइबर ठगी में चार आरोपी गिरफ्तार, लेकिन क्या नीमच में सक्रिय फर्जी बैंक खातों के पूरे सिंडिकेट तक पहुंचेगी पुलिस? शेयर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा, दर्जनों बैंकिंग किट जब्त, सूत्रों के दावों में शहर के कुछ नाम चर्चा में, नेटवर्क की गहराई से जांच जरूरी

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नीमच। ऑनलाइन ठगी के खिलाफ नीमच पुलिस की कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक और गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है—क्या करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के पीछे सिर्फ चार आरोपी हैं, या शहर में सक्रिय फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क इससे कहीं बड़ा है?

बीते दिनों ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0 के तहत नीमच सिटी पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया था। आरोप है कि लोगों को शेयर बाजार में मोटा मुनाफा कमाने और बेहतर ट्रेडिंग टिप्स देने का लालच देकर वेबसाइट और फोन कॉल के माध्यम से जाल में फंसाया जाता था। इसके बाद अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 62 एटीएम कार्ड सहित बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज एवं अन्य सामग्री जब्त की थी।
लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब फर्जी बैंक खातों की उपलब्धता और उनके पीछे सक्रिय कथित नेटवर्क को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बेरोजगार युवाओं व मजदूर वर्ग को लालच, 5 से 10 हजार रुपये में खाते लेने का दावा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नीमच शहर में कथित तौर पर ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो बेरोजगार युवाओं और मजदूर वर्ग के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। दावा है कि एक खाते के बदले 5 हजार से 10 हजार रुपये तक देने का प्रलोभन दिया जाता है। हांलाकि बैंक खातों में सेविंग, करंट, कॉरपोरेट जैसों की राशि अलग अलग रहती हैं। खाते खुलने के बाद एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और खाते से जुड़ी सिम सहित पूरी बैंकिंग किट अपने कब्जे में ले ली जाती है।

आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल आगे साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, गेमिंग से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त रकम के हस्तांतरण में किया जाता है। ऐसे मामलों में खाताधारक का बैंक खाता ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होने का खतरा रहता है।

सूत्रों के दावों में जैद, अमन, केशव, गोलटी और एक टायर कारोबारी से जुड़े व्यक्ति जैसे नामों का उल्लेख है। दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग बैंक खाते खुलवाने और उनकी पूरी किट हासिल करने की गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है जो जांच का विषय हैं।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल—खातों की सप्लाई चेन तक पहुंचेगी जांच?

ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0 की कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी के मामलों में बैंक खातों का नेटवर्क अहम कड़ी हो सकता है। ऐसे में जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित न रहकर यह भी पता लगाने की दिशा में आगे बढ़नी चाहिए कि इस्तेमाल किए गए बैंक खाते किसने खुलवाए, उनकी किट किसके पास पहुंची, खातों से रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

यदि शहर में फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है, तो उसकी पहचान करना और उसे तोड़ना साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जरूरी होगा।

अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में फर्जी बैंक खातों के पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा? क्या संदिग्ध खातों, लेनदेन और सिम कार्ड की कड़ियों को जोड़कर अन्य लोगों तक पहुंचा जाएगा?

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