एसपी ऑफिस के सामने देर रात तक चाय की गुमटी पर जमावड़ा, सड़क बनी पार्किंग, रिटायर्ड जवान के नाम आवंटित गुमटी किराए पर चलाई जा रही, चाय के साथ गुटखा-सिगरेट की बिक्री पर भी सवाल, पुलिस की नशे से दूरी मुहिम के सामने ही व्यवस्था पर उठे सवाल
नीमच। जिले में कानून व्यवस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले पुलिस अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने ही यातायात व्यवस्था और सरकारी नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य मार्ग पर संचालित चाय की गुमटी के बाहर देर रात तक लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। बेतरतीब खड़े दोपहिया वाहन और सड़क की सीमा तक लगी कुर्सियां राहगीरों की परेशानी बढ़ा रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एसपी कार्यालय के सामने ही यह स्थिति है, तो शहर के दूसरे इलाकों में यातायात व्यवस्था की निगरानी किस तरह हो रही होगी?
चाय की गुमटियों पर आने वाले लोग अपने दोपहिया वाहन सड़क किनारे आड़े-तिरछे खड़े कर देते हैं। देखते ही देखते मुख्य मार्ग का बड़ा हिस्सा पार्किंग में तब्दील हो जाता है। यात्री प्रतीक्षालय के पास की एक दुकान के बाहर कुर्सियां लगाकर देर रात तक लोगों के बैठने से आवागमन के लिए सीमित जगह बचती है। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है और जाम के साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
रिटायर्ड जवान के नाम गुमटी आवंटन, फिर किराए पर कैसे?
मामले का दूसरा पहलू गुमटी के आवंटन से जुड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, न्यायालय के माध्यम से पूर्व में एक रिटायर्ड आर्मी जवान महेंद्र नामक के नाम गुमटी आवंटित की गई थी, ताकि वे उससे अपना जीवनयापन कर सकें। लेकिन अब आरोप है कि गुमटी स्वयं संचालित करने के बजाय किराए पर दी गई है। यदि आवंटन की शर्तों के विपरीत इसका संचालन हो रहा है, तो संबंधित जिम्मेदारों को इसकी जांच करनी चाहिए। आखिर जिस उद्देश्य से गुमटी आवंटित की गई थी, क्या उसका पालन हो रहा है?
एसपी कार्यालय के सामने ही गुटखा-सिगरेट की बिक्री!
गुमटी पर चाय के साथ गुटखा, सिगरेट और बीड़ी जैसी सामग्री बेचे जाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में पुलिस विभाग की नशे से दूरी बनाने और जागरूकता फैलाने की मुहिम के बीच यह स्थिति सवाल खड़े करती है। हालांकि, इन गतिविधियों और आवंटन की शर्तों के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग सड़क पर हो रही अव्यवस्थित पार्किंग और अतिक्रमण पर कार्रवाई करेगा? क्या गुमटी के आवंटन की शर्तों की जांच होगी? और क्या देर रात तक सड़क किनारे लगने वाले जमावड़े को व्यवस्थित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?