खबर छपी तो आरईएस से GJ पासिंग वाहन किया ग़ायब, अब सामने आया ₹24,500 का बिल, कुमावत ट्रैवल्स के बिल में अगस्त का किराया दर्ज, वाहन की लॉगबुक और वास्तविक किलोमीटर का कोई अता―पता नहीं

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नीमच। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग यानी RES में गुजरात पासिंग वाहन GJ31BA9730 के अटैचमेंट को लेकर ईई भेरूलाल कतिजा पर उठे सवालों के बाद अब मामले में नया दस्तावेज सामने आया है। पहले खबर प्रकाशित होने के बाद उक्त वाहन को विभाग से हटाए जाने की बात सामने आई है। वहीं अब अगस्त 2026 के वाहन खर्च का ₹24,500 का बिल सामने आया है, जिसने पूरे मामले को फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।

सामने आए बिल के अनुसार कुमावत ट्रैवल्स मंदसौर की ओर से यह बिल दिनांक 1 सितंबर 2026 को तैयार किया गया है। बिल में संबंधित वाहन क्रमांक GJ31BA9730 दर्ज है और विवरण में अगस्त माह 2026 का वाहन सेवा का उल्लेख किया गया है। बिल की कुल राशि ₹24,500 दर्शाई गई है।

वाहन हट गया, लेकिन बिल ने खड़े कर दिए नए सवाल

मामला सामने आने के बाद वाहन अब विभाग में नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि वाहन नियमों के तहत अटैच था तो उसकी स्वीकृति, अनुबंध, लॉगबुक, ड्यूटी चार्ट और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही?

सबसे बड़ा सवाल ₹24,500 के इस बिल और वाहन की वास्तविक आवाजाही को लेकर है। बिल में अगस्त के पूरे महीने की सेवा दर्ज है, लेकिन इसमें कितने किलोमीटर वाहन चला, किन-किन स्थानों पर गया और किस अधिकारी/कार्य के लिए उपयोग हुआ, इसका विवरण बिल में स्पष्ट नहीं है। और तो ओर वाहन नीमच के विभाग में हैं और बिल मंदसौर जिले में लगाया गया।

यदि विभाग के रिकॉर्ड में वाहन की लॉगबुक उपलब्ध है तो उसमें दर्ज किलोमीटर, तारीख और ड्यूटी का मिलान इस बिल से किया जाना चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि जितना वाहन वास्तव में चला, भुगतान उसी अनुपात में हुआ या नहीं।

मामले में पहले हर महीने 30 से 40 हजार रुपए तक भुगतान होने की चर्चा सामने आई थी। अब अगस्त माह का ₹24,500 का बिल सामने आने से यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि संबंधित वाहन के नाम पर अलग-अलग महीनों में कुल कितने बिल लगाए गए और सरकारी राशि से कितना भुगतान किया गया।

यदि अन्य महीनों में भी इसी तरह के बिल लगाए गए हैं तो प्रत्येक बिल को संबंधित महीने की लॉगबुक और वास्तविक वाहन संचालन से मिलाना जांच का विषय हैं। खासकर यह जांचना होगा कि वाहन की वास्तविक किलोमीटर रनिंग और बिल में दर्शाई गई सेवा के बीच कोई अंतर तो नहीं है।

गुजरात की गाड़ी, मध्यप्रदेश का सरकारी भुगतान

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वाहन गुजरात पासिंग है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि आरईएस में इसे किस प्रक्रिया के तहत अटैच किया गया था। वाहन के परमिट, टैक्स, फिटनेस, बीमा और अन्य वैधानिक दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया? अटैचमेंट की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी? भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई?

अधिकारी के सामने अब रिकॉर्ड से जवाब देने की चुनौती

मामले में आरईएस के कार्यपालन यंत्री भेरूलाल कतिजा से पहले भी जानकारी लेने का प्रयास किया गया था। लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाने के कारण सवाल बने हुए हैं। अब सामने आए बिल के बाद विभाग के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह वाहन अटैचमेंट से लेकर भुगतान तक पूरा रिकॉर्ड स्पष्ट करे।

यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि वाहन का वास्तविक उपयोग कम होने के बावजूद अधिक भुगतान के लिए बिल लगाए गए। हालांकि इसकी पुष्टि लॉगबुक, ड्यूटी रिकॉर्ड, बिल और भुगतान अभिलेखों के मिलान से ही हो सकती है।

अब जांच इन सवालों की होनी चाहिए

GJ31BA9730 को आरईएस में किस आदेश से अटैच किया गया?
वाहन के अटैचमेंट की अवधि कितनी थी?
अगस्त में वाहन कितने किलोमीटर चला?
अगस्त की लॉगबुक में क्या दर्ज है?
24,500 के बिल का भुगतान हुआ या भुगतान प्रक्रिया में है?
इसी वाहन के नाम पर अन्य महीनों में कितने बिल लगाए गए?
बिलों में दर्ज राशि और वास्तविक किलोमीटर में कितना अंतर है?
वाहन के दस्तावेजों का विभाग ने सत्यापन किया था या नहीं?
वाहन हटाए जाने के बाद भी इसके पुराने भुगतान की जांच होगी या नहीं?

एक तरफ सवाल उठने के बाद गुजरात पासिंग वाहन का विभाग से हटना और दूसरी तरफ उसी वाहन के अगस्त माह के ₹24,500 के भुगतान का बिल सामने आना—मामले को और गंभीर बनाता है। अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि लॉगबुक, अटैचमेंट आदेश, बिल और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की है।

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