ट्रांसफर आदेश फाइलों में, अफसर मैदान में, चार महीने बाद भी जीरन से नहीं छूट रहा मोह? ट्रांसफर के बावजूद एसआई रामपाल सिंह की मौजूदगी पर उठे सवाल, क्या बड़े मामलों से तो नहीं हैं नाता?

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नीमच। जिले के पुलिस महकमे में स्थानांतरण आदेशों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला जीरन थाना क्षेत्र के हर्कियाखाल सहायता केंद्र से जुड़ा है, जहां पदस्थ एसआई रामपाल सिंह का नाम 22 मई 2026 को जारी स्थानांतरण सूची में दर्ज था। बताया जा रहा है कि उनका तबादला मनासा थाना किया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें जीरन क्षेत्र से रिलीव नहीं किया गया।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। इसी दौरान रामपाल सिंह की पदोन्नति भी हुई और वे एएसआई से एसआई बन गए। इसके बावजूद उनकी तैनाती जीरन क्षेत्र में ही बनी रहने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

हाल ही में त्योहारों के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा जीरन क्षेत्र में निरीक्षण किया गया। सामने आए एक फोटो में एसआई रामपाल सिंह राठौर भी नजर आ रहे हैं। इसके बाद सवाल यह है कि आखिर स्थानांतरण आदेश जारी होने के करीब चार महीने तीन दिन बाद भी संबंधित अधिकारी को नई पदस्थापना के लिए रिलीव क्यों नहीं किया गया?

सबसे अहम बात यह है कि 3 अगस्त 2026 को डीआईजी स्तर से भी आदेश जारी कर स्थानांतरण के बाद रिलीविंग में देरी का कारण स्पष्ट करते हुए जवाब मांगे जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद अगर अधिकारी अब भी उसी क्षेत्र में दिखाई दे रहे हैं, तो यह स्थिति पुलिस विभाग की स्थानांतरण व्यवस्था और आदेशों के पालन पर सवाल खड़े करती है।

थाना प्रभारी का जवाब भी चर्चा में

6 अगस्त 2026 को इस मामले में जीरन थाना प्रभारी उमेश यादव से फोन पर चर्चा कर एसआई रामपाल सिंह के तबादले के बावजूद रिलीव नहीं किए जाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर थाना प्रभारी का जवाब था कि— “आपको कोई विशेष दिक्कत है क्या? कर देंगे रिलीव, अब कर देंगे।”

अब सवाल यह है कि जब स्थानांतरण आदेश पहले ही जारी हो चुका था, तो रिलीव करने में इतनी लंबी देरी क्यों लग रही हैं? अगर कोई प्रशासनिक या विभागीय कारण था, तो उसे स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखा गया?

पुलिस विभाग में स्थानांतरण का उद्देश्य अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती में प्रशासनिक संतुलन और व्यवस्था बनाए रखना होता है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि पिछले महीनों में नीमच पुलिस विभाग में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले हुए, उनमें से कितनों ने आदेश के अनुसार नई जगह ज्वाइन कर ली और कितने अब भी पुरानी जगह पर बने हुए हैं?

अगर किसी अधिकारी का तबादला हो चुका है, तो उसे महीनों तक रिलीव नहीं करने के पीछे आखिर कौन-सा प्रशासनिक कारण है?
और यदि कोई विशेष कारण है, तो क्या विभाग ने उसकी लिखित अनुमति या आदेश जारी किया है?

एक तरफ पुलिस विभाग कानून और नियमों के पालन का संदेश देता है, दूसरी तरफ अगर स्थानांतरण आदेश महीनों तक अमल में नहीं आते तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित क्यों रह जाते हैं?

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