नीमच। शहर में यात्री बसों के जरिए कृषि जिंसों के परिवहन का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हेडगेवार बस स्टैंड के पीछे गुरुवार शाम करीब 4 बजे जय श्री गणेश ट्रेवल्स की लग्जरी बस में बड़ी मात्रा में धनिया की बोरियां लोड किए जाने का मामला सामने आया। बस में यात्रियों के साथ इस तरह कृषि जिंस लोड किए जाने से बस के अतिरिक्त भार और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पहले लंबे रूट की बसों की छत पर लगे कैरीबैग में कृषि जिंस सहित अन्य सामान भेजा जाता था। राजस्थान में बसों की छत पर माल परिवहन को लेकर कार्रवाई और प्रतिबंध के बाद अब कथित तौर पर माल को बस की डिक्की और सीटों के नीचे तक पहुंचाया जा रहा है।
गुरुवार को सामने आए मामले में धनिया की बोरियां बस के अंदर रखी जाती दिखाई दीं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यात्री परिवहन के लिए संचालित बसों में कृषि उपज को इस तरह व्यवसायिक रूप से लोड करने की अनुमति है या नहीं? यदि निर्धारित नियम इसकी अनुमति नहीं देते, तो फिर लंबे समय से चल रही इस व्यवस्था पर परिवहन विभाग और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी क्यों नहीं दिखाई दे रही?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि लंबे रूट की कुछ बसों में कई बार यात्रियों के साथ बड़ी मात्रा में कृषि जिंसों का परिवहन किया जाता है। मंडी टैक्स से बचने के लिए इस तरह परिवहन किए जाने की चर्चा भी सामने आती रही है, हालांकि इसकी वास्तविकता जांच का विषय है।
अब सवाल विभाग से—जांच होगी या सिर्फ नजरअंदाज?
मामले में सबसे बड़ा सवाल परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है। यदि बस में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लोड किया गया है तो इसकी जांच कौन करेगा? क्या बस का कुल भार, माल की मात्रा और उसके परिवहन संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी? और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय होगी या मामला इसी तरह चलता रहेगा?
यात्रियों को लेकर चलने वाली बस में अतिरिक्त माल का परिवहन केवल नियमों का सवाल नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में जिम्मेदार विभाग के लिए यह जरूरी है कि पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
बस मालिक से सवाल-जवाब, जवाब ने खड़े किए नए सवाल
मामले को लेकर जब बस मालिक रवि छाबड़ा से फोन पर सवाल किए गए तो उन्होंने कृषि जिंस लोड किए जाने को लेकर कहा कि उन्हें अपनी जमीन की उपज बेचने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
सवाल:–आपकी बस में खुलेआम कृषि जिंस लोड की जा रही हैं, इसकी अनुमति है क्या?
जवाब:― किसी की अनुमति लेना पड़ेगी क्या, मेरी पट्टे और रजिस्ट्री वाली जमीन का माल बेचने के लिए।
सवाल:― इतनी कितनी जमीन है, जो आए दिन कृषि जिंस की लोडिंग होती है?
जवाब:― मेरी खुद की 80 बीघा जमीन है, उसका माल है। छापना हो तो छापो, मैं जवाब दे दूंगा, जहाँ देना होगा।
अब बस मालिक के इस दावे की भी जांच जरूरी है कि बस में लोड की जा रही कृषि जिंस वास्तव में उनकी बताई गई जमीन की उपज है या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि यात्री बस में इतनी मात्रा में कृषि उपज लोड करने की अनुमति परिवहन नियमों के तहत है या नहीं।