रिपोर्ट― धीरज नायक
नीमच। जिले की सड़कों पर दौड़ती यात्री बसें अब सफर का साधन कम, खतरे का संकेत ज्यादा बनती जा रही हैं। तेज कमाई की होड़ में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ताजा मामला “जय श्री गणेश” बस से जुड़ा है, जिसमें शादी समारोह में जा रहा एक परिवार लापरवाही का शिकार हो गया। हादसे में रामप्रसाद खटीक गंभीर रूप से घायल हुए, जिनके पैर में फ्रैक्चर होने पर निजी अस्पताल में ऑपरेशन तक कराना पड़ा।
मामला मीडिया में उछलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। वरिष्ठ अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए बस को रामपुरा थाने में खड़ा करवाया और पुलिस ने जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली। थाना प्रभारी विपिन मसीह के अनुसार 20 अप्रैल को हुई इस घटना में बस चालक की लापरवाही सामने आई, जिसके चलते बस क्रमांक MP44ZD8188 के खिलाफ बीएनएस की धारा 281 और 225A के तहत मामला दर्ज किया गया है। बस मालिक को नोटिस जारी कर चालक की जानकारी मांगी जाएगी और आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
लेकिन यहीं से कहानी में बड़ा सवाल खड़ा होता है…
घायल पक्ष का आरोप है कि जिस बस में वह सवार था उसका बस क्रमांक (MP44ZD1888) से हादसा हुआ, उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा “जय श्री गणेश” ट्रेवल्स की किसी दूसरी बस को पकड़कर खानापूर्ति कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, हादसे के बाद असली बस को बस संचालक के द्वारा “शादी में जाने” का बहाना बनाकर गायब कर दिया गया और उसकी जगह दूसरी बस उसी रूट पर दौड़ा दी गई। अब सवाल उठता हैं कि क्या हादसा करने वाली बस कही नियमों के विरुद्ध तो नहीं चलाई जा रही थी। अगर ये सच है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि खुली मिलीभगत और सिस्टम की कमजोरी का संकेत है।
जिले में चल रहा है ‘मुनाफे का खेल’, सुरक्षा पूरी तरह फेल
नीमच में कई यात्री बसें बिना फिटनेस, बिना परमिट और अधूरे दस्तावेजों के खुलेआम दौड़ रही हैं। न तो ओवरलोडिंग पर नियंत्रण है, न ही चालकों की जिम्मेदारी तय हो रही है। यहाँ तक कि सड़कों पर ओवर स्पीड में हर दिन बसे दौड़ती हुई दिखाई दे रही हैं। वही सैकड़ों यात्री इन बसों में अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
पुलिस की कार्रवाई जरूर शुरू हुई है, लेकिन सवाल यह है कि— क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी?
या फिर वाकई नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बस माफियाओं पर सख्त अभियान चलेगा?
अब देखना होगा कि प्रशासन दिखावे से आगे बढ़कर असली दोषियों तक पहुंचता है या फिर एक और मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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