नीमच। सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था और संकल्प का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब नीमच के युवा समाजसेवी अरूल अरोरा के नेतृत्व में निकली श्री सांवरिया सेठ पैदल यात्रा गुरुवार को मंडफिया धाम पहुँची। चार फरवरी को नीमच से प्रारंभ हुई इस पदयात्रा ने लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय करते हुए हजारों श्रद्धालुओं को भक्ति के सूत्र में बांध दिया। यात्रा के समापन पर मंडफिया धाम में श्री सांवरिया सेठ को महाप्रसादी का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद विशाल महाप्रसादी वितरण हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
संकल्प से शुरू हुई यात्रा, आस्था में बदली

यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था की विजय और साहस का प्रतीक बन चुकी है। समाजसेवी अशोक अरोरा (गंगानगर) पर 4 फरवरी 2024 को नीमच के लायंस पार्क क्षेत्र में हुए जानलेवा हमले के बाद, उनके पुत्र अरूल अरोरा ने उसी दिन यह संकल्प लिया था कि हर वर्ष इसी तिथि को धर्म और विश्वास का संदेश देने वाली पैदल यात्रा निकाली जाएगी। इसी संकल्प के तहत वर्ष 2025 में पहली बार यह यात्रा शुरू हुई और इस वर्ष इसका दूसरा आयोजन हुआ, जिसने और भी व्यापक स्वरूप ले लिया।
हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता, हर वर्ग रहा शामिल

नीमच से मंडफिया धाम तक निकली इस पदयात्रा में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग, हर वर्ग और हर समाज के लोग शामिल हुए। पूरे मार्ग में “जय सांवरा सेठ” के जयघोष गूंजते रहे और भक्ति का वातावरण बना रहा। यात्रा का रात्रि विश्राम राजस्थान के निम्बाहेड़ा में हुआ, जहाँ प्रसिद्ध भजन गायक छोटूसिंह राणवा ने देर रात तक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। गुरुवार सुबह पुनः यात्रा प्रारंभ होकर दोपहर में मंडफिया धाम पहुँची।









