50-60 साल से काबिज परिवारों ने वन विभाग की कार्रवाई पर जताई नाराजगी, बेदखली रोकने की लगाई गुहार, रेंजर बोले― वन विभाग की हैं भूमि

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नीमच। जिले के मनासा क्षेत्र में वन भूमि पर वर्षों से खेती कर जीवनयापन कर रहे कई परिवारों ने वन विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से राहत की मांग की है। मंगलवार को करीब 8-10 ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंच आवेदन देकर आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारियों ने रात के समय पहुंचकर उनकी कृषि भूमि पर खंती खुदवा दी, जिससे फसल और जमीन को नुकसान पहुंचा है।

आवेदन देने वालों में कंकूबाई पति कनीराम बंजारा निवासी ग्राम मालाहेड़ा ब्लॉक झिकरियाखेड़ी तथा गुड्डा पिता गब्बा बंजारा निवासी झिकरियाखेड़ी, मन्नालाल पिता हजारीलाल, बद्रीलाल पिता श्यामलाल बंजारा निवासी मालाहेड़ा शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले 50 से 60 वर्षों से उक्त भूमि पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार ने वर्षों की मेहनत से पत्थर निकालकर और जमीन समतल कर खेती योग्य बनाया था।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 8 मई की रात वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और खेतों में खंती खुदवा दी। वहीं 9 मई को जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें वन भूमि से बेदखल नहीं किया जाए और जीवनयापन को देखते हुए भूमि का पट्टा प्रदान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आय का एकमात्र साधन है, ऐसे में कार्रवाई से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मांग पूरी नही होने पर ग्रामीणों ने आत्मदाह की चेतावनी भी दी हैं।

वही इस संबंध में मनासा रेंजर शाश्वत द्विवेदी से फोन पर चर्चा की गई तो उनका कहना हैं कि उक्त जमीन वन विभाग की हैं और किसी को भी कोई पट्टा विभाग द्वारा जारी नही किया गया। उन्होंने कोई दस्तावेज पेश नही किए। जिसके बाद विभाग द्वारा 7 मई को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई।

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