नीमच। नीमच के आरईएस यानी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग में एक गुजरात पासिंग वाहन को अटैच किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वाहन नंबर GJ31BA9730 है और चर्चा है कि इसका उपयोग विभागीय कामकाज के लिए किया जा रहा है। सवाल है कि आखिर मध्यप्रदेश के सरकारी विभाग में गुजरात पासिंग वाहन को किस प्रक्रिया और किस अनुमति के आधार पर अटैच किया गया?
जानकारी के अनुसार यह वाहन आरईएस के कार्यपालन यंत्री बीएल कतिजा के उपयोग के लिए अटैच होने की बात सामने आई है। अब वाहन के अटैचमेंट के साथ-साथ इसकी लॉगबुक, वास्तविक संचालन और सरकारी भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार वाहन की लॉगबुक के संधारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जबकि यदि किसी वाहन का भुगतान सरकारी राशि से किया जा रहा है तो उसके संचालन, किलोमीटर, ड्यूटी और उपयोग का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है। आरईएस के कार्यपालन यंत्री भेरूलाल कतिजा अपनी मनमानी कर रहे हैं। और वाहन का उपयोग कम कर बिल अधिक लगाए जा रहे हैं।
मामले में सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि वाहन के नाम पर हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। जिसका एक फर्जी बिल भी सामने आया हैं। जिसकी जिम्मेदार अधिकारियों को कोई भनक नहीं।
अब सवाल सिर्फ वाहन के गुजरात पासिंग होने का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या वाहन के परमिट, टैक्स, फिटनेस, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था? वाहन अटैच करने की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी और इसके लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई?
जब मीडिया ने आरईएस के कार्यपालन यंत्री बीएल कतिजा से मामले में जानकारी लेने का प्रयास किया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
मीडियाकर्मी सवाल करने उनके कार्यालय पहुंचते हैं तो टालमटोल किया जाता हैं। बाहर से ही साहब नहीं है का जवाब मिलता हैं। और साहब पीछे के रास्ते से रफूचक्कर हो जाते हैं। और तो ओर कभी अचानक TL मिटिंग याद आ जाती हैं और कुर्सी छोड़ देते हैं। फिर दूसरे वाहन में बैठ निकल जाते हैं। अधिकारी के इस रवैये से लगता हैं मानो पूरे मामले में मीडिया से बचा जा रहा हैं।
वहीं इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव से भी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन वह भी मीडिया से बचते नजर आए।
अगर अटैचमेंट नियमों के अनुसार हुआ है तो दस्तावेज सामने रखकर स्थिति साफ की जा सकती हैं और अगर कहीं नियमों में गड़बड़ी है, तो जांच के बाद जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
ऐसे में यह भी जांच होनी चाहिए कि जिले में कितने शासकीय कार्यालयों पर दूसरे राज्यों के वाहन अटैज किये गए हैं। फिलहाल GJ पासिंग वाहन से लेकर लॉगबुक और सरकारी भुगतान तक कई सवाल हैं और इन सवालों के जवाब का इंतजार है।