युवाओं के भविष्य से खिलवाड़? मान्यता के बिना प्रवेश का खेल, श्री एसआर ग्रुप ऑफ कॉलेज पर उठे गंभीर सवाल, सादे कागज की गारंटी पर बिक रहा भविष्य! नेवड़ में उच्च शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल उजागर
नीमच। जिले में शिक्षा के नाम पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। नेवड़ स्थित श्री एसआर ग्रुप ऑफ कॉलेज पर आरोप हैं कि वह बिना स्पष्ट और वैध मान्यता के विभिन्न पाठ्यक्रमों में छात्रों का पंजीयन कर रहा है। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब छात्रों एवं अभिभावकों को संस्थान द्वारा सादे कागज पर लिखित गारंटी दिए जाने की जानकारी सामने आई।
बड़े-बड़े विज्ञापनों से छात्रों को किया जा रहा आकर्षित
बताया जा रहा है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा क्षेत्रभर में होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्रचार किया जा रहा है। आरोप है कि वर्तमान सत्र 2026-27 में एलएलबी और बीए-एलएलबी जैसे महत्वपूर्ण कानून पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं कुछ ऐसे पाठ्यक्रमों में भी प्री-रजिस्ट्रेशन किए जाने की बात सामने आ रही है, जिनकी मान्यता अथवा संचालन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
बंद या विवादित पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश प्रक्रिया?
स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों का आरोप है कि बीए, बीएससी, बीकॉम सहित कुछ अन्य पाठ्यक्रमों में भी छात्रों से संपर्क कर प्रवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं बीए-बीएड और बीएससी-बीएड जैसे पाठ्यक्रमों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि मान्यता संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं है तो प्रवेश प्रक्रिया कैसे संचालित की जा रही है?
सादे कागज पर लिखित आश्वासन, कानूनी वैधता पर सवाल
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि मान्यता संबंधी सवाल उठाने वाले छात्रों और परिजनों को संस्थान की ओर से सादे कागज पर लिखित आश्वासन दिया जा रहा है कि उनका भविष्य और शैक्षणिक वर्ष प्रभावित नहीं होगा। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी पाठ्यक्रम की वैधता का निर्धारण संबंधित विश्वविद्यालय, नियामक संस्था अथवा शासन करता है, ऐसे में निजी स्तर पर दी जा रही इस प्रकार की गारंटी की वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
अभिभावकों और नागरिकों ने उठाई कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के कई अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि छात्रों को मान्यता संबंधी तथ्य बताए बिना प्रवेश के लिए प्रेरित किया गया है तो यह युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर भी सवाल
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो दर्जनों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य संकट में पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मान्यता संबंधी स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो प्रवेश प्रक्रिया किस आधार पर संचालित की जा रही है? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो फिर छात्रों को सादे कागज पर गारंटी देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
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